"यह 108 मोतियों का ताना-बाना है
शब्दों की सुंदर वर्णमाला है"
यज्ञतुलिका
एक ऐसा काव्य-संग्रह है
जहाँ शब्द आहुति बनते हैं
और भाव यज्ञ।
इन कविताओं में
कहीं चाँद की चुप्पी है,
कहीं रात्रि का धैर्य,
कहीं प्रेम की पूर्णता,
तो कहीं उसकी अपूर्णता ही उसका सत्य है।
हर कविता के बाद
एक रिक्त पृष्ठ
पाठक को आमंत्रित करता है—
कि वह भी इस यज्ञ में
अपने विचार अर्पित करे।
लेखक: यज्ञेश लाखोटिया
संकलन-वर्ष: 2026
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