वो रास्ता कहीं मेरे भीतर से होगा
जहाँ सामना मेरा ईश्वर से होगा
…
दिलों के अंधेरे भी सूरज मिटाए
नहीं सिर्फ़ चेहरे ही उजले बनाए
…
हमें सफ
वो रास्ता कहीं मेरे भीतर से होगा
जहाँ सामना मेरा ईश्वर से होगा
…
दिलों के अंधेरे भी सूरज मिटाए
नहीं सिर्फ़ चेहरे ही उजले बनाए
…
हम
छोड़ो, क्या चाहना वफ़ा तुमसे
क़र्ज़ होते नहीं अदा तुमसे
मेरे चेहरे पे शिकन कोई नहीं
ये तो टूटा है आईना तुमसे
***
छोड़ो, क्या चाहना वफ़ा तुमसे
क़र्ज़ होते नहीं अदा तुमसे
मेरे चेहरे पे शिकन कोई नहीं
ये तो टूटा है आईना तुमसे
***
लेखक की क़रीब सौ ग़ज़लों और नज़्मों के इस मेले में ग़ज़ल को ज़िन्दगी में और ज़िन्दगी को ग़ज़ल में उतारने की कोशिश की गई है। ये ग़ज़लें इंसानी ज़िन्दगी के रूहानी पहलुओं को बयाँ कर
ज़िन्दगी भर समेटते ही रहे
फिर भी पूरा सामान बिखरा है
झोंपड़ी ने सहेज कर रखा
महलों में ख़ानदान बिखरा है
______
ये मोहब्बत की तेज-रौ कश्ती
जिस्म की हद से गुज़र जाएगी
ब
ज़िन्दगी भर समेटते ही रहे
फिर भी पूरा सामान बिखरा है
झोंपड़ी ने सहेज कर रखा
महलों में ख़ानदान बिखरा है
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ये मोहब्बत की तेज-रौ कश्ती
जिस्म की हद से गुज़र ज
ग़ज़लों में हिन्दी का ज़्यादा से ज़्यादा समावेश कर उन्हें और हिंदुस्तानी और सरल क्यों
ना बनाएँ I इस संग्रह में यही प्रयास कि या है I आज़ा दी का अमृत महोत्सव भी चल रहा
है I कु छ ग़ज
शायरी उस हिमाक़त का नाम है जो दूसरों के दिलों में बिना इजाज़त ताक - झाँक करती है I
सफ़र दीवानगी का हो तो फिर मंज़िल नहीं ढूँढे
किसी काग़ज़ की कश्ती ने कभी साहिल नहीं ढूँढे
----<
शायरी उस हिमाक़त का नाम है जो दूसरों के दिलों में बिना इजाज़त ताक - झाँक करती है I
सफ़र दीवानगी का हो तो फिर मंज़िल नहीं ढूँढे
किसी काग़ज़ की कश्ती ने कभी साहिल नहीं ढूँढे
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ग़ज़लों में हिन्दी का ज़्यादा से ज़्यादा समावेश कर उन्हें और हिंदुस्तानी और सरल क्यों
ना बनाएँ I इस संग्रह में यही प्रयास कि या है I आज़ा दी का अमृत महोत्सव भी चल रहा
है I कु छ ग़ज
लेखक की क़रीब सौ ग़ज़लों और नज़्मों के इस मेले में ग़ज़ल को ज़िन्दगी में और ज़िन्दगी को ग़ज़ल में उतारने की कोशिश की गई है। ये ग़ज़लें इंसानी ज़िन्दगी के रूहानी पहलुओं को बयाँ कर
लेखक की क़रीब सौ ग़ज़लों/नज़्मों की हर ग़ज़ल/ नज़्म जैसे तसव्वुर (कल्पना) के समुन्दर में उठने वाला एक बुलबुला है जिसकी पहचान इश्क़, विद्रोह, जंग, वेदना, आक्रोश, ख़ुदा, दिल और कायना
मानव मन एक अंतरिक्ष की तरह है, असीमित, अनंत, रहस्यमयी और रोमांचकारी किंतु एक व्यवस्था से, एक असीम सत्ता से संचालित I कविताओं का यह संग्रह उस यान की तरह है जो उस अनंत विस्तार में कदम
सौ कविताओं का ये संकलन एक इंद्रधनुष की तरह
है पर सप्तरंगी नहीं शतरंगी। इन कविताओं में प्रेम,
विद्रोह , रोष, माँ, बेटी, पिता, बेचैनी, उदासीनता,
देशभक्ति , निराशा, साँस, कली, चाँ
कविताओं के इस संकलन में विभिन्न तरह के भाव व्यक्त किए गए हैं, इश्क़ यानी प्रेम को दर्शाते हुएl सिर्फ़ महबूब और महबूबा की नहीं है ये कोई मिल्कियत; ख़ुदा और बन्दे के बीच जो रिश्ता है
पचास कविताओं का एक छोटा सा संकलन है ये। कविताओं में सभी तरह के भाव व्यक्त किए गए हैं। जो अपने मन में है या इससे जुड़ा हुआ है, उसे शब्द देने का एक प्रयास है। संकलन को और बड़ा भी रखा जा