Slowly, slowly catchy monkey
By Suresh Subrahmanyan in Humour & Comedy | পড়ার জন্য : 529 | পছন্দ: 0
                                                           Slowly, slowly catchy monkey Man does not grow old  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 05:29 PM
थोङा थोङा फिल्मी
By sneh goswami in Fantasy | পড়ার জন্য : 1,413 | পছন্দ: 1
ये फिल्मी नहीं    थोङा थोङा फिल्मी    थाली में रोटी डालके निंदी ने चकले वाली रोटी तवे पर डाली और तेज तेज कदम ब  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 05:22 PM
अँधेरों से डर अब भी लगता है...
By Writer's Hub in Poetry | পড়ার জন্য : 6,546 | পছন্দ: 5
अकेला ना करना मुझे कभी... अँधेरों से डर अब भी लगता है... दुनिया है बड़ी मुश्किल... पर ये दिल अब सिर्फ तेरे संग ही चलता है...   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 05:22 PM
The unfinished interview
By Khushi Lokesh in Mystery | পড়ার জন্য : 486 | পছন্দ: 1
Natasha is not a type of girl with rich background but of a mediocre class who is recently graduated and moved to Manhattan, New York to start a new independent life. She rented a small house with her roommate Mia and are frequently broke. Natasha got a job as a junior journalist for a popular media  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 05:19 PM
I Still Exist...
By Dilip Patel in General Literary | পড়ার জন্য : 479 | পছন্দ: 0
If a house made of bricks, mortar, wood and metal could tell a tale, here is one.. I will not tell you a lie. That is the prerogative I leave for you, the humans. The picture you may create in your mind from what I remember how I looked over 50 years ago, may not induce any romantic feelings. Thre  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 05:08 PM
You are enough
By Shanya in Mystery | পড়ার জন্য : 478 | পছন্দ: 1
It's just another night, just another 3a.m.., when you cry yourself to sleep. You indulge yourself into the memories of a specific someone and wish things could have been different, if you would have not let them go, or maybe if you met them in another life, another timeline. You try to feel okay ab  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 05:08 PM
When I opened the door,
By Arni in Poetry | পড়ার জন্য : 527 | পছন্দ: 1
Caught sight of the most beautiful eyes Voice struck in my throat as I admired the view Hand on the knob debating to move  As your round doe eyes lightened my entire being  I found myself gravitating towards your smile And I did just that  Lucky giddied my brain, warmth danced my hear  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 04:51 PM
निश्चिन्तता
By SURENDRA ARORA in General Literary | পড়ার জন্য : 798 | পছন্দ: 0
लघुकथा    निश्चिन्तता    " आजकल  धरती में  पानी कम तो है ही  खारा भी बहुत है । " " इसीलिये  बोरिंग की गहराई बढ़  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 04:51 PM
देश हित
By TarunTyagi in Poetry | পড়ার জন্য : 1,476 | পছন্দ: 0
मुसीबत की इस घड़ी में सभी देहवासिओं से अनुरोध है कि घर रहकर ही इस महामारी को जड़ से खत्म करने में अपना सहयोग प्रदान कर  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 04:44 PM
मेरे फरिश्तों की यादें❤️
By Teesha Rathore in Poetry | পড়ার জন্য : 543 | পছন্দ: 0
वो भी क्या दिन थे जब सर्दियोँ के साथ बाबा की डाँट आती थी स्वेअतर और टोपी पहन लो  वो भी क्या दिन थे जब दादी बाबा स छुप   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 04:24 PM
तेरी कमी में मेरी ज़िंदगी ✨
By Teesha Rathore in Poetry | পড়ার জন্য : 723 | পছন্দ: 0
रंग ही तो था तेरे चेहरे पर  उतर भी गया तो क्या ? तेरी नकाब पोशी का चेहरा  खुल भी गया तो क्या ? तेरी झूठी आबरू का चोला&  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 04:22 PM
je tu mainu mil jaave
By Shalvi Singh in Poetry | পড়ার জন্য : 331 | পছন্দ: 0
main hova subah, tu bana suraj, meri ankhan neendra din dhal jaave, Qismat de hath te fisal yaara, kive tainu samjhaave, je tu mainu mil jaave... haye mainu kinni sang aave.....  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 04:21 PM
क्या वाकई रुक सकती थी भगत सिंह की फांसी
By mukeshkumarairwal@gmail.com in Mystery | পড়ার জন্য : 638 | পছন্দ: 0
असेंबली बम कांड में गिरफ्तारी देने के बाद 6 जून 1929 को भगत सिंह ने अदालत में एक लंबा बयान दिया था उन्होंने कहा था असेंब  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 04:21 PM
मैं और तुम
By Teesha Rathore in Poetry | পড়ার জন্য : 978 | পছন্দ: 2
मेरे दिल के अरमानों में तुम अपनी खुशी के फसाने ढूंढ लेना मैं बेलेहजे में मुस्कुराऊं तो तुम मुझे अपनी आबरू का चोला उ  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 04:18 PM
एक साथ खड़े होने का वक्त आ गया है
By Shubham Tiwari in Poetry | পড়ার জন্য : 596 | পছন্দ: 1
एक साथ खड़े होने का वक्त आ गया है  चलो अब लडने का वक्त आ गया है    ऊब सा गया हूँ चुपचाप बैठकर  कुछ कर गुजरने का वक्  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 04:17 PM