"अल्फाजों का शहर" अपने नाम को सार्थक करती हुई किताब है। इसको पढ़ने से ऐसा प्रतीत होता है कि ये इंसान के खुद के ही जज़्बात है, जो इंसान के अंतर्मन में कहीं जगह किया करते है। इस पुस्तक की लेखिका ने उन जज़्बातो को शब्द रूप देकर उन्हें कागज़ पर उकेरा है। इस पुस्तक मे लेखिका ने रचनात्मकता के इन्द्रधनुषीय रंग बिखेरे है जिसमें कही भक्ति की पराकाष्ठा, कहीं मन की पीड़ा, कहीं रिश्तो के टूटने की टीस, तो कहीं जिन्दादिली से सबकुछ सह जाने की कला को बखूबी उकेरा है। पुस्तक की सुन्दरता की समीक्षा कम शब्दों मे कर पाना तो कठिन है क्यूंकि आसा नहीं होता इतना किसी के लिए भी के मन के भावों को शब्दों में व्यक्त किया जा सके जो कि लेखिका ने बड़ी सहजता के साथ इस पुस्तक में किया है।