ज़िन्दगी के सफ़र में कुछ लम्हें ऐसे भी आते है, जो ख़्वाबों की तरह महसूस होते है, हक़ीक़त में होते हुए भी किसी नर्म धुंध में लिपटे हुए। "अनकहे जज़्बात" ऐसी ही एक दास्तान है — प्रिया और आर्यन सर के दिल की वह खामोश सरग़ोशी, जिसे शब्दों की ज़रूरत कम और एहसास की तासीर ज़्यादा है। यह किताब सिर्फ़ मोहब्बत की कहानी नही, बल्कि उन रिश्तों का आईना है, जो बेनाम होते हुए भी दिल की गहराइयों में उतर जाते है। प्रिया की ख्वाहिशें, उसकी झिझक, और आर्यन सर का सुकून भरा वजूद—इन सबके दरमियान उठती धड़कनों की आवाज़ को लफ़्ज़ देना आसान नही था।