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ankahe jazbaat / अनकहे जज़्बात दास्ताँ-ए-रूह : ख्यालों की परछाईं

Author Name: Preetanjali | Format: Paperback | Genre : Young Adult Fiction | Other Details

ज़िन्दगी के सफ़र में कुछ लम्हें ऐसे भी आते है, जो ख़्वाबों की तरह महसूस होते है, हक़ीक़त में होते हुए भी किसी नर्म धुंध में लिपटे हुए। "अनकहे जज़्बात" ऐसी ही एक दास्तान है — प्रिया और आर्यन सर के दिल की वह खामोश सरग़ोशी, जिसे शब्दों की ज़रूरत कम और एहसास की तासीर ज़्यादा है। यह किताब सिर्फ़ मोहब्बत की कहानी नही, बल्कि उन रिश्तों का आईना है, जो बेनाम होते हुए भी दिल की गहराइयों में उतर जाते है। प्रिया की ख्वाहिशें, उसकी झिझक, और आर्यन सर का सुकून भरा वजूद—इन सबके दरमियान उठती धड़कनों की आवाज़ को लफ़्ज़ देना आसान नही था।

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प्रीतान्जली

प्रीतान्जली, (बैचलर ऑफ़ साइंस, बैचलर ऑफ़ लाइब्रेरी साइंस,मास्टर ऑफ़ लाइब्रेरी साइंस, यूजीसी नेट लाइब्रेरी साइंस, मास्टर ऑफ़ इंग्लिश)

"मैने कोशिश की है प्रिया के दिल की अनकही बातों और जज़्बातों की गहराईयों को पन्नों पर बुनने की| इस कहानी के पात्र की भावनाओं-प्यार, उम्मीद और खामोशी के बीच के नाजुक रिश्तों को उजागर करने की| मैने इस कहानी मे अपने शब्दों के माध्यम से कोशिश की है कि पाठक प्रिया के दिल की हर धड़कन, हर उम्मीद और हर टूटते जज़्बात को महसूस कर सके।"

"प्रिया की एकतरफ़ा मोहब्बत की खामोशियाँ इतने सजीव ढंग से उकेरने की कोशिश की है कि हर पाठक खुद को उसकी दुनिया से जोड़ सके, उसके दर्द की मार्मिकता, कहीं उम्मीद की रोशनी, कहीं सामाजिक प्रश्नों की गंभीरता, तो कहीं प्रेम की कोमल भावनाएँ पाठक समझ सके। इस भावपूर्ण सफ़र को लिखते समय, मुझे मार्गदर्शन मिला जितेन्द्र कुमार पालीवाल जी से, जिन्होंने कहानी की संवेदनशीलता को और भी निखारने में मदद की। मै श्रीमान जितेन्द्र कुमार पालीवाल जी का दिल की गहराइयों से धन्यवाद करती हूँ|"

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