Share this book with your friends

Atma Ki Anant Yatra / आत्मा की अनंत यात्रा In context of Gita / महापुरुषों के विचार गीता के परिपेक्ष्य में

Author Name: Dr. Mahendra Singh, Ram Malik | Format: Hardcover | Genre : Religion & Spirituality | Other Details

आत्मा की अनंत यात्रा” गीता के गहन सिद्धांतों पर आधारित एक अद्वितीय कृति है, जो आत्मा के रहस्यमय स्वरूप और उसके ईश्वर से संबंध को उजागर करती है। यह पुस्तक न केवल गीता के दृष्टिकोण को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करती है, बल्कि विभिन्न दार्शनिकों के विचारों को भी समाहित करती है, जिससे पाठक को आध्यात्मिकता का व्यापक दृष्टिकोण मिलता है।

इसमें आत्मा की अमरता, कर्म और पुनर्जन्म का सिद्धांत, मोक्ष की प्राप्ति के मार्ग, तथा योग और ध्यान की शक्ति का सुंदर वर्णन है। लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि ईश्वर कोई दूरस्थ सत्ता नहीं, बल्कि प्रत्येक जीव और ब्रह्मांड के हर तत्व में विद्यमान है।

विभिन्न दार्शनिकों के उद्धरण और दृष्टिकोण इस पुस्तक को और भी समृद्ध बनाते हैं, जिससे यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन के गहरे प्रश्नों के उत्तर खोजने का मार्गदर्शक बन जाती है।

Read More...
Hardcover

Ratings & Reviews

0 out of 5 ( ratings) | Write a review
Write your review for this book
Hardcover 598

Inclusive of all taxes

Delivery

Item is available at

Enter pincode for exact delivery dates

Also Available On

डॉ. महेन्द्र सिंह, राम मलिक

डॉ.  महेन्द्र सिंह एक स्नातक अभियंता हैं तथा उन्होने जैन धर्म में स्नाकोतर शिक्षा प्राप्त की है।आध्यात्मिक रुचि के कारण उन्होनें चिन्मय मिशन से गीका एवं वेदांत का औपचारिक अध्ययन किया। कर्म योग पर आधारित पुस्तक से उनके आध्यामिक लेखन की शरुआत हुई, तथा उन्होने चिन्मय मिशन के गीता के पाछ्यक्रम का भी हिन्गी अनुवाद किया। आपका लक्ष्य है गीता का प्रचार प्रसार तथाा उनका मिशन है घर घर गीता।


राम मलिक, जो शिक्षा से इंजीनियर हैं, ने गीता, वेद, उपनिषद और हिंदू दर्शन का गहन अध्ययन कर आत्मा और ईश्वर के संबंध को समझने में जीवन समर्पित किया। महान चिंतकों और विद्वानों की प्रेरणा से उन्होंने यह सत्य पाया कि आध्यात्मिक ज्ञान ही सर्वोच्च धन है, जो बांटने पर और बढ़ता है। जैसा कि श्रीमद्भगवद्गीता में कहा गया है: “न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।” (इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र कुछ भी नहीं है।)

सृष्टिकर्ता की कृपा, प्रकृति के आशीर्वाद और मित्रों के सहयोग से उन्होंने इस मार्ग पर निरंतर साधना की और विश्वास रखा कि यह प्रयास उन्हें परम आनंद और संतोष प्रदान करेगा।

Read More...

Achievements

+3 more
View All