इस उपन्यास का केन्द्रीय पात्र एक गरीब समाज में जन्मा, और उच्च शिक्षित होकर समाज के कितने ही रंगों को देखता है और जन्म से लेकर मृत्यु पर्यंत इस पानी के बिभिन्न रंगों के संपर्क में आता है और अपनी गरीबी को ही न कोसते हुए उसने अपन्मे गाँव से जातिवाद का विनाश करके उसे एक आदर्श गाँव के रूप पें स्थापित किया। एक दलित कन्या के विवाह में आये कुछ दलित बारातियों द्वारा ठाकुरों के कूए का पानी पी लेने के फलस्वरूप प्रारम्भ हुआ उसका पानी के रंगों से उत्पन्न संघर्ष कहाँ तक पहुंचा, उसे यहाँ उकेरा गया है। कुछ जानवरों के माध्यम से भी इस पानी के बिभिन्न रंगों को व्यक्त किया गया है।