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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palकुछ लफ्ज ...... मेरी कलम से
यह कथन बिल्कुल सत्य है कि किताबे खामोश रहकर भी बहुत कुछ बोल पाती है और पाठक के मन और मस्तिष्क पर एक अमिट छाप छोड़ जाती है । और भावों को यदि कविता का रूप दे दिया जाए तो वो और अधिक आकर्षण का केंद्र बन जाती है । भावों को एक सुर मिल जाता है और कम शब्दो में एक बड़ी बात व्यक्त होती है ।कविताओं के इस संग्रह में लेखिका ने जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया है। कलम के महत्व को बताया है। कुछ गंभीर और कुछ हास्यपद तथ्यो का संगम है ये संग्रह। बहुत सरल शब्दो मे लेखिका ने नारी शक्ति के महत्व को उजागर किया है और जीवन में माता पिता और अलग अलग रिश्तों का कितना महत्व है इस पर भी प्रकाश डाला है।
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Your review has been deleted and won’t appear on the book anymore.पूजा आनंद
इन कविताओं के संग्रह को प्रस्तुत करने वाली लेखिका पूजा आनंद 43 वर्ष की है। इनका जन्म 6 मार्च 1979 को हरियाणा के ही एक छोटे से गांव में हुआ। बचपन से ही इनका कला के प्रति असीम प्रेम था । शिक्षा के क्षेत्र में ये पिछले 20 वर्ष से है । पारिवारिक और शैक्षणिक दोनो जिम्मेदारियों को निभाते हुए इन्होंने लेखन के साथ अपने आप को बांध कर रखा । हरियाणा के यमुनानगर जिले से संबंध रखने वाली और यही के ही कॉलेज में वाणिज्य विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद पर नियुक्त पूजा आनंद को अपने विचारो को कलम के माध्यम से प्रस्तुत करने का शोंक बचपन से ही था। परंतु इस कला को और निखारने का कार्य वास्तव में इन्ही के विभाग की अध्यापिकाओ ने किया। इन्हे इस बात का एहसास करवाया कि इनमे ऐसा गुण है कि ये भी कुछ अच्छा लिख सकती है। इसके पश्चात ही इन्होंने अपने भावों को कलम के माध्यम से शब्दो में पिरोना आरंभ किया । शिक्षा प्रदान करने के साथ साथ इन्होंने लेखन के क्षेत्र में अपने योगदान को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया । इन्होंने अपनी कविताओं में नारी शक्ति के महत्व को बताया है। जीवन के विभिन पहलुओं को अपने कविताओं के माध्यम से दर्शाया है। हास्यारस का भी इनकी कविताओं में एक विशेष स्थान रहा है। सरल और सटीक शब्द इनकी कविताओं को परिपूर्ण करते है।
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