Share this book with your friends

Mohan Se Mahatma / मोहन से महात्मा जेलों की भूमिका

Author Name: Dr Deepak Kumar | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

प्रस्तुत पुस्तक “मोहन से महात्मा - जेलों की भूमिका" में उस समय की जेल की स्थितियों और कारा सुधारों पर गाँधीजी की टिप्पणियों और सुझावों पर प्रकाश डाला गया है।

पुस्तक में, गांधीवादी काल में दक्षिण अफ्रीकी और भारतीय जेलों की स्थितियों से दुनिया को परिचित कराने का कार्य भी किया गया है। एक महान आत्मा जेल की कठिनाइयों और अपमानों को सहने में कैसे कामयाब रही तथा अपराध, अपराधियों और जेलों के बारे में उनके क्या विचार हैं।

प्रस्तुत पुस्तक महात्मा के जेल के अंदर की कहानी, उनकी जेल की दिनचर्या, बाहरी दुनिया को संदेश और उनके साधारण व्यक्ति से महात्मा में परिवर्तन में जेलों की भूमिका का मूल्यांकन करने की कोशिश करती है। 

कैसे एक व्यक्ति ने उत्पीड़न और नकारात्मकता से भरे माहौल में उपलब्ध सीमित साधनों का सकारात्मक उपयोग स्वयं के महात्मा में परिवर्तन के लिए किया। 

Read More...

Ratings & Reviews

0 out of 5 ( ratings) | Write a review
Write your review for this book
Sorry we are currently not available in your region.

Also Available On

डा. दीपक कुमार

डाॅ. दीपक कुमार, बिहार पशुचिकित्सा महाविद्यालय, पटना से पशुचिकित्सा विज्ञान में परास्नातक हैं। वर्तमान में दीपक गृह विभाग (कारा), बिहार में कारा अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर दीपक बंदी कल्याण एवं कारा सुधार के लक्ष्यों को साधने में लगे हैं। उनके कई लेख व स्तंभ प्रकाशित हो चुके हैं। पूर्व में इस पुस्तक का अंग्रेजी संस्करण "Mohan to Mahatma: The Role ofJails" प्रकाशित हो चुका है।

दीपक को आपके सुझावों का इंतजार है - aapkadeeepak4u@gmail.com

Read More...

Achievements

+5 more
View All