प्रयोजनमूलक में ‘प्रयोजन’ शब्द के साथ ‘मूलक’ परसर्ग लगने से प्रयोजनमूलक पद बना है। प्रयोजन से तात्पर्य है ’उद्देश्य’ अथवा ’प्रयुक्ति’। ‘मूलक’ से तात्पर्य है आधारित। अत: किसी विशिष्ट उद्देश्य के अनुसार प्रयुक्त भाषा को प्रयोजनमूलक भाषा कहते हैं । इस प्रकार प्रयोजनमूलक हिन्दी से तात्पर्य हिन्दी का वह प्रयुक्तिपरक विशिष्ट रूप या शैली है जो विषयगत तथा संदर्भगत प्रयोजन के लिए विशिष्ट भाषिक संरचना द्वारा प्रयुक्त की जाती है।
प्रयोजनमूलक रूप की वजह से हिन्दी भाषा जीवित है। आज तक साहित्यिक हिन्दी का ही अध्ययन किया जाता था, लेकिन साहित्यिक भाषा किसी भी भाषा को स्थित्यात्मक बनाती है और प्रयोजनमूलक भाषा उसको गत्यात्मक बनाती है। वर्तमान जीवन में गत्यात्मक भाषा ही जीवित और प्रचलित रह सकती है। आज साहित्य तो संस्कृत में भी है, लेकिन उसका गत्यात्मक रूप-प्रयोजनमूलक रूप समाप्त हो गया है । हिन्दी का प्रयोजनमूलक रूप अधिक शक्तिशाली तथा गत्यात्मक है। हिन्दी का प्रयोजनमूलक रूप हिन्दी के विकास में सहयोग दे रहा है, साथ ही साथ उसको जीवित रखने एवं लोकप्रिय बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है । इन सभी दृष्टियों से विभिन्न प्रयोजनों के लिए गठित समाज खंडों द्वारा किसी भाषा के ये विभिन्न रूप या परिवर्तन ही उस भाषा के प्रयोजनमूलक रूप हैं।
इस पुस्तक में प्रयोजनमूलक हिंदी को हिन्दी की प्रकृति, प्रवृत्ति और प्रयोग के अनुरूप, छोटी-छोटी इकाइयों में विभाजित कर सुगम-सुबोध शैली में प्रस्तुत किया गया है । प्रयोजनमूलक हिन्दी विषय के अलावा पत्र-व्यवहार, अनुवाद, मीडिया लेखन, पुस्तक समीक्षा आदि बहुउपयोगी विषय यहाँ संगृहीत हैं ।
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manjuspc66
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