एक सामान्य व्यक्ति द्वंद्व के दायरे में रहता है, परन्तु एक ब्रह्मज्ञानी संत ब्रह्मांड के सभी द्वंद्वों से ऊपर हैं और पूरी तरह से एक अद्वैत सर्वोच्च चेतना में स्थापित है। सब उनके हैं और वह सबके हैं। यही ब्रह्मज्ञानी संत की पूर्ण अनुभूति है। ब्रह्मज्ञानी गुरु का महत्व इतना अधिक है कि जब भगवान राम पृथ्वी पर अवतरित हुए, तब उन्होंने भी गुरु वशिष्ठ जी के श्री चरणों की सेवा करके सच्चा ज्ञान प्राप्त किया। जब गुरु के बिना भौतिक ज्ञान संभव नहीं है, तो आत्मा का ज्ञान जो की सर्वोच्च है, वह बिन गुरु कैसे संभव है?
यह एक कविता का संग्रह है जो ब्रह्मज्ञानी गुरुदेव पूज्य संत श्री आशारामजी बापू के पवित्र चरणों में समर्पित है। यह कविताओं का संग्रह पूज्य बापूजी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है, जिन्होंने दिन रात दयालुतापूर्वक अपनी परवाह किये बिना ही उस दिव्य पवित्र प्रेम को दुनिया में बांटा, लाखों सामान्य लोगों के जीवन को बदल दिया और उन्हें जीवन जीने का अलौकिक मार्गदर्शन दिया।