तेरा नाम इश्क उपन्यास अजय सिंह राणा का सबसे चर्चित उपन्यास है। हरियाणा साहित्य अकादमी ने इस उपन्यास को मुंशी प्रेमचंद श्रेष्ठ कृति पुरस्कार से भी नवाजा है। यह उपन्यास राष्ट्रवाद में उलझी एक प्रेम कहानी है जिसमें प्रेम,दोस्ती, राष्ट्रवाद, बलिदान आदि तत्व शामिल है। इस उपन्यास की कहानी कश्मीर घाटी से शुरू होकर चंडीगढ़ के रास्ते मुंबई होते हुए अंत में तस्वीर में ही आकर खत्म होती है। इस उपन्यास में एक तलाश है अपने प्रेमी की तलाश। नायिका की तलाश क्या पूरी हो पाती है? जब अचानक नायक कहानी से गायब हो जाता है तो वह उसे खोजने निकल पड़ती है। विभिन्न पड़ाव को पार करती है यह कहानी अंत में भावुकता के चरम सीमा पर पहुंच जाती है।
कथा की सुन्दर बुनावट, वातावरण का सजीव चित्रण, निराली नाटकीयता, जादुई कल्पना, देश और काल का अनुसरण करता प्रांजल प्रकृति-चित्रण, पात्रों की अन्त: प्रकृति में प्रविष्ट होकर उनकी मनोदशा का सहज और मार्मिक चित्रण तथा प्रेम को बृहत परिप्रेक्ष्य के फ लक पर लाकर उसके उदात्त रूप का अहसास कराने का उद्देश्य आदि के साथ-साथ पाठक को आद्योपान्त अपने पाश में बांधने की शक्ति, अजय सिंह राणा कृत उपन्यास ‘तेरा नाम इश्क़’ की प्राथमिक विशेषताओं में सम्मिलित है। हिन्दी उपन्यास की कथा परम्परा के कुछ मिथकों से हटकर उप-शीर्षक, गीत तथा एक अदृश्य पात्र की रचना आदि नए प्रयोग भी इस कृति के रूप-विधान को प्रभावोत्पादक बनाते हैं। इस रचना की कथा के गर्भ में प्रेम है लेकिन लेखक ने इस मानवीय प्रेम पर जिस प्रकार देश-प्रेम को प्रतिष्ठित किया है, उसका विन्यास वैचारिक वैभव की वसुन्धरा से उपजी हृदय की कोमल भाव-शृंखला के नैसर्गिक पल्लवन के रूप में दिखाई देता है।