हमारी नई "पुस्तक आशियाना तुम्हारा "आशा करती हूं। आप सभी के दिल को छू जायेगी और आपको ये पुस्तक बहुत पसंद आयेगी । कहते हैं कि जब एक परिवार में प्यार होता है तो उसी परिवार से मिलकर घर बनता है । ठीक उसी प्रकार एक आशिक के प्यार से संजोकर आशियाना बनता है । हर आशियाने में एक आशिक होता है । जिसमें एक जूनून होता है और उसी जूनून से वो प्यार का सही मतलब बताता है । आशिक कभी दोखा या फरेब नहीं करते और जो ये करे .. वो आशिक ही नहीं होते । आशिक प्रेम का सही अर्थ जानते हैं और उसकी परिभाषा सभी को सिखाते हैं । अपनी दीवानगी की संसार में बारिश करके दिखाते हैं। वो कभी साथ नहीं छोड़ते और यादों के अहसास में ही जी लेते हैं । जो सच्चे आशिक होते हैं वो कभी बीच राह में छोड़कर नहीं जाते वो आखिरी सांस तक साथ देते हैं । जैसे हीरे की परख एक जौहरी आसानी से कर लेता है । उसी तरह से प्रेम को पहचानना और आसानी से उसकी परख कर लेना एक आशिक की होती है । मैं संजना चौधरी सभी कवि \ कवयित्री का ह्रदय से आभार व्यक्त करती हूं । आप सभी ने अपनी सुंदर रचना से इसको सुशोभित किया है । हमारी संकलनकर्ता मुस्कान केसरी ने बहुत ही अथक प्रयासों से इस पुस्तक को प्रकाशित किया है । मुझे उम्मीद है कि इस पुस्तक को पढ़कर आप अपना भरपूर प्यार देंगे ।
मोहब्ब्त में दगा देने वाले मिल जायेंगे आसानी से ।
लेकिन सच्चा आशिक पाना मुश्किल होता है ।।
घर तो तुम खरीद लोगे चंद पैसों में ..!
लेकिन एक आशियाना मिलना मुश्किल होता है ।
क्योंकि आशियाना ..तो अनमोल होता है ।।