आपकी पसंदीदा प्रेरणादायक यात्रा, ' आत्म विश्वास ' एक नय स्वरुप में....
शब्द, प्रवचन भी होते हैं मंत्र भी होते हैं, शब्द ज्ञान भी होते हैं तथा मिथ्या वाणी भी| मैं इस पुस्तक के माध्यम से कुछ शब्द आपके लिए छोड़ के जा रहा हूँ, अब ये निर्णय आपको करना है की आपको उन शब्दों से मंत्र का निर्माण करना है या फिर प्रवचन समझ के भूल जाना है|अब कुछ छ्णों के लिए भूल जाइए अपने मोबाइल को, अपनी समस्त दुनिया भर की चिंता को बस मेरे साथ चलिए, ‘ आत्म विश्वास’ के सुनहरे सफ़र में|