अमताक्खर एक काव्य संग्रह है जिस में जीवन गंधी कविताओं का संग्रह है। कपिल सहारे जी इस काव्य में आधुनिक कविता का परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत कर रहा है।
अमतााक्खर’ दोो शब्दोंं सेे मिलकर बनाा हैं, अं मत और
अक्खर। पाालीी काा अमत, संंस्कृृत मेंं अमृृत और पाालीी काा अक्खर,
संंस्कृृत मेंं अक्षर लिखाा जााताा हैं। अं तःः अमतााक्खर याा अमृृतााक्षर काा
शााब्दििक अर्थथ हुुआ, अजर-अमर रहनेे वाालेे अक्षर। ‘अमतााक्खर’
कविताा कीी कितााब हैं, ं जोो लेेखक केे उन भाावोंं और विचाारोंं कोो
दर्शाातीी हैं, ं जोो उनकेे अन्दर मौौलिक रूप सेे समााए हुुए हैं। ं इस कितााब
मेंं 50 कवितााएँँ हैं, ं जोो लेेखक व्दााराा बड़ीी हीी खूू
बसूूरतीी सेे भिन्न-भिन्न
भाावोंं कोो प्रधाान बनााकर लिखीी गई हैं। ह ं म आशाा करतेे हैंंकि आप
सभीी सम्मााननीीय पााठक इन मौौलिक भाावोंं-विचाारोंं काा भरपूूर आनंदं
उठाातेे हुुए लेेखक कीी लेेखनीी कोो अथााह प्याार व सरााहनाा करेंगेंे।