सुरज पूर्व से उगता है, वर्षा होती है ! सबकुछ सामान्य बातें हैं ! पर सामान्य क्या नहीं है ? हमारे विचार हमारा नज़रिया। छोटी- छोटी बातों पर हम इतना गौर करने लगें हैं , बड़ी बातें भूलना सामान्य होता जा रहा है! किसी की अनुपस्थिति हमे खलती है , पर जो हैं साथ में उनका एहसास क्यों नहीं होता ? सहज शब्दों में कुछ सामान्य सी बातें पिरोकर आप तक कविताओं के ज़रिए पहुंचाने की एक छोटी सी कोशिश है ! इस छोटी सी कोशिश से शायद कोई बड़ा बदलाव तो नहीं आएगा! क्यों नहीं आ सकता कोई बदलाव? हमारे सोचने का दायरा इतना नकारत्मक हो गया है इस दायरे से बाहर हम निकल ही नहीं पा रहे हैं या निकलना नहीं चाहते!