इस्लाम एक एकेश्वरवादी धर्म है जो ईश्वर पर विश्वास करता है, जिसे ‘’अल्लाह’’ कहा जाता है| कब्रिस्तान में जाने के बाद सर्वप्रथम ‘वजू’, फिर अल्लाह की स्तुति, तत्पश्चात मृतक के लिए दुआ की जाती है|
इस उपन्यास के नायक, सनौली गाँव के एक गरीब, असहाय हामिद चाचा हैं| ये निःसंतान और काफी गरीबी अवस्था में जीवन यापन कर रहे होते हैं| दिन व दिन पर्याप्त खाना, दवाई, फल एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों के लिये तरसते रहते| अपने-पराये कोई इन्हें पूछते तक नहीं थे, पर ये दोनों हमेशा एक दूसरे के लिये मरते रहे| खाना और दवाई के अभाव में चाची, एक दिन इस दुनिया को अलविदा कह चल देती है| चाचा मजबूर हो चाची को कब्र में दफनाकर, भूखे -प्यासे आजीवन उस कब्र के पास उसके लिये दुआ माँगते-माँगते, सदा के लिये ख़ुदा को प्यारे हो जाते हैं|
मैंने अपने स्वप्न और कल्पना को, मानवीय भावनाओं का वस्त्र पहनाकर एवं मानवीय रूप, आकार ग्रहण कराकर, ‘बेपनाह मोहब्बत‘ उपन्यास के रूप में आपके समक्ष प्रस्तुत है|
मैं न तो दार्शनिक हूँ, न ही दर्शनग्य, न ही मेरा अपना कोई दर्शन है, और न ही मुझे लगता है, कि दर्शन द्वारा मनुष्य को सत्य की उपलब्धि हो सकती है| ये केवल मेरे मन के प्रकाश का स्फुरण अथवा प्ररोह है, जिन्हें मैंने एक कहानी का रूप देने के लिए शब्द-मूर्त करने का प्रयास किया है| मैंने कल्पना के पंखों से उड़ने की मात्र कोशिश की है, पर कहाँ पहुँच पाई, ये तो आप लोग ही (जो प्रेरक के रूप में हर वक्त मेरे साथ हैं) बता सकते हैं|
अंत में, मैं इस भूमिका के रूप में, प्रस्तुत अपने विचारों, विश्वासों तथा जीवन मान्यताओं की त्रुटियों एवं कमियों के सम्बंध में अपने पाठकों से अग्रिम क्षमा माँगती हुई,
-तारा सिंह