भारत विभाजन की उर्दू कहानियाँ
अनुवादक: फ़रीद अहमद
28 जनवरी 1933, हम्बर स्टोन रोड, कैम्ब्रिज, लंदन से चौधरी रहमत अली ने एक किताबचा Now or Never (अभी या कभी नहीं) शीर्षक से प्रकाशित किया, जिसमें पंजाब के ‘प’, उत्तर-पश्चिम अफ़गान के ‘अ’, कश्मीर के ‘क’, सिंध ‘स’ तथा बलूचिस्तान के अंतिम लफ्ज़ ‘तान’ को मिला कर “पाकिस्तान” शब्द बनाया गया।
जहाँ एक ओर पत्र-पत्रिकाओं द्वारा इस किताबचे और इस किताबचे के अन्दर गढ़ा गया एक नया शब्द “पाकिस्तान” का खूब मज़ाक उड़ाया गया। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम लीग तथा अन्य सियासी दलों ने भी इस को उतनी गंभीरता से नहीं लिया, जितनी गंभीरता से लिया जाना चाहिए था। जबकि देखा जाये तो मात्र साढ़े चार पन्नों पर लिखे गए इस छोटे से किताबचे में भौगोलिक रूप से बहुत बड़े भू-भाग को चिन्हित कर एक नये राष्ट्र पाकिस्तान की नींव रखी गई थी। धीर-धीरे यह नींव इतनी मज़बूत होती गई कि 1940 के लाहौर अधिवेशन में मुसलामानों के लिए स्वतंत्र रियासतों का प्रस्ताव पारित किया गया। हालाँकि इस प्रस्ताव में ‘पाकिस्तान’ का नाम नहीं आया था सिर्फ मुसलमानों के लिए स्वतंत्र रियासतों की मांग की गई थी। लेकिन यह अलग स्वतंत्र मुस्लिम...........................