भारत विभाजन की उर्दू कहानियाँ
अनुवादक: फ़रीद अहमद
28 जनवरी 1933, हम्बर स्टोन रोड, कैम्ब्रिज, लंदन से चौधरी रहमत अली ने एक किताबचा Now or Never (अभी या कभी नहीं) शीर्षक से प्रकाशित
मुहर्रम नामा
उर्दू साहित्य के मशहूर लेखक, संपादक, पत्रकार, निबंधकार, इतिहासकार ख्वाजा हसन निज़ामी द्वारा 'कर्बला साहित्य' पर लिखी गई एक विशेष पुस्तक 'मुहर्रम नामा'.
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“ग़ालिब : क़िस्से, लतीफ़े तंज़”
ग़ालिब की पुर-लुत्फ़ गुफ़्तगू का हर कोई दिवाना था। हालाँकि ग़ालिब कम बोलते थे। लेकिन जो भी बोलते थे उसमें लुत्फ़ की कोई कमी न होती थी। क़िस्से, ल
अंगारे
दिसंबर 1932 ई० लखनऊ की ‘निज़ामी प्रेस’ से “अंगारे” शीर्षक से एक किताब प्रकाशित हुई। उर्दू में अपने तर्ज़ की यह एक अलग ही किताब थी। जिसमें 9 कहानियाँ और एक ड्रामा शा
मुक़दमा ठंडा गोश्त
‘मंटो’ ने अपनी सबसे विवादित व चर्तित कहानी ‘ठंडा गोश्त’ पर अश्लीलता के आरोप व मुक़दमें की पूरी कहानी का आँखों देखा हाल को अपने ख़ास अंदाज़ में पेश किय
औरत के जज़्बात, एहसासात, दर्द, शिद्दत और मोहब्बत को अपने नर्म लहज़े व आम अलफ़ाज़ में मोती मोती पिरोकर ग़ज़ल व नज़्म में पेश करने वाली शायरा ‘परवीन शाकिर’ किसी तअर्रुफ़ की मोहताज नह