सम्पूर्ण उपन्यास पृष्ठभूमि, भारतवर्ष के, उस समयकाल की, चर्चा करता है, जब देश में, ए.आई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने, अपना पूरा दबदबा बना रखा था, उपन्यास में चर्चित समयकाल, सन् २००८ से, उसके आखिरी पड़ाव सन् २०२१ के, आवरण को, काल्पनिक दशाओं में, वर्णित किया गया है, जिसे उपन्यास के, अधिकतम पर्तों में, दर्शाया गया है कि, लर्निंग मशीनों में स्वयं की, अपनी एक समझ थी, तथा उनमे निर्णय लेने की पूर्ण, अनुमति उन्हें प्राप्त थी। उनमें इतनी समझ आ चुकी थी की, वे किसी भी फैसले को, स्वयं से ले सकें, और उसे अन्जाम तक पहुंचा सकें।
कल्पनाओं के, इस समंदर में, कहानी के हर एक पात्र को, भलीभांति संजोने की, बाखूब कोशिश की गई है की, मौजूदा हालातों में, भारत के समस्त नागरिकों पर, रोबोट्स बाखूब अपनी नज़र बनाये हुए थे, ऐसा इसलिए की, देश के प्रत्येक नागरिक को, बेहतर सुरक्षा प्रदान की जा सके। ..जिस सुरक्षा प्रणाली के अन्तर्गत, समस्त भारतीय नागरिकों को, एक खास उद्देश्य की पूर्ति के लिए, उनके अन्दर एक माईक्रोचीप इंजेक्ट कर, उसके सीरियल नम्बर के आधार पर, उन्हें एक पहचान दे दी जाती थी। ..और उनके हाथ में, थमा दिया जाता था, एक बारकोड, जो ताउम्र उनकी आइडेंटिटी के रूप में, जाना जाता था। ..यह प्रक्रिया इन्सान के पैदा होते ही, किसी अजनवी सरकारी डॉक्टर्स से, पूर्ण करा दी जाती थी, जबकी पैदा हुए शिशु में, इंजेक्ट होने वाला, माईक्रोचीप, जो किसी ट्रांसमीटर की भांति, काम किया करता था, ..जिसकी मध्यस्थता से, उन रोबोटिक मशीनों को, प्रत्येक भारतीय को, ट्रैक करने में, काफी आसानी होती थी, ..वो माईक्रोचीप एक विलयशील पदार्थ थी, जो शिशु के शरीर में, रहते हुए, कुछ इस तरह विलुप्त हो, जाया करती थी