मेरे 'दास्ताँ-ए-सफ़र' इस किताब को आप केवल एक किताब कि नज़र सें न देखिए । एक किताब होने के साथ ही ये , ख़ुद को साबित करने के लिये अपने सफ़र पर निकले हुए एक 'मुसाफ़िर' कि जुबानी है । मैने मेरे सफ़र में जो भी हक़ीक़ते देखी है या जो भी महसूस किया है , वो सब मैने अपने 'ग़ज़लें' और 'नज़्मों' के जरिये बयाँ किया है ।
मुझे उम्मीद है कि मेरी ये किताब , मेहनत के रास्ते पर अपना मुकद्दर तलाश रहे किसी मुसाफ़िर कि 'हमदर्द' बनेगी तो किसी मुसाफ़िर कि 'हौसला-अफ़ज़ाई' भी करेगी ।
मै उम्मीद करता हूँ कि ये किताब आप लोगों को पसंद आए ।
- कल्पेश पाटील