इस पुरुष प्रधान समाज में राम की सर्वत्र चर्चा होती है, सीता की क्यों नहीं? आज का प्रगतिशील समाज राम को इसलिए दोष देता है कि उन्होंने गर्भवती सीता का परित्याग किया, उसे वन में निर्वासित किया। उनका यह भी मानना है, कि सदियों से धरतीपुत्री सीता जैसी स्त्रियाँ, सत्ता के हाथों की गुड़िया रही है और राम सरीखे मर्यादा पुरुषोत्तम सत्ता तक पहुँचने के साधन। इतिहास में सीता के जन्म को लेकर भी अनेकानेक भ्रांतियाँ है। कहते हैं, सीता पृथ्वी से निकलीं। क्या बच्चे पृथ्वी से जन्म लेते हैं? जिस धनुष को दस-दस हजार राजा नहीं उठा सके, सीता उसी को उठाकर प्रतिदिन सफाई करती थी, क्या यह तथ्य विचित्र प्रतीत नहीं होता? उसी प्रकार सीता पृथ्वी में समाहित हो गई। सर्वत्र रामराज्य स्थापित हो गया। यह कहाँ तक सत्य है? सीता और राम के बारे में क्या सोचती है आज की पीढ़ी? इन्हीं सब बातों की पड़ताल करता रवीन्द्र प्रभात का यह उपन्यास सीता से जुड़ी प्रमुख घटनाओं को सामने लाने का एक विनम्र प्रयास है।