गॉड मैन सिंड्रोम एक समकालीन राजनीतिक उपन्यास है जो सत्ता, अहंकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं के क्षरण की जटिल यात्रा को गहराई से चित्रित करता है। कथा एक करिश्माई और लोकप्रिय प्रधानमंत्री के माध्यम से दिखाती है कि कैसे जन-समर्थन, मीडिया नैरेटिव और अत्याधुनिक प्रचार तंत्र मिलकर एक लोकतांत्रिक नेता को धीरे-धीरे व्यवस्था से ऊपर स्थापित कर देते हैं। यह उपन्यास ‘टीवी वाले भारत’ की चमकदार छवि और ‘ज़मीन वाले भारत’ की कठोर वास्तविकताओं बेरोज़गारी, ग्रामीण संकट और सामाजिक असमानता के बीच के गहरे विरोधाभास को उजागर करता है। सत्ता के ह्यूब्रेस, विरासत के नाम पर स्मारक-निर्माण, भावनात्मक राजनीति, मीडिया की भूमिका और नागरिक प्रतिरोध जैसे विषय इस कथा को केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय और नैतिक बनाते हैं। God Man Syndrome एक चेतावनी भी है और एक प्रश्न भी, कि जब नागरिक चुप हो जाते हैं और सच शोर में दब जाता है, तब लोकतंत्र किस दिशा में बढ़ता है।
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