यह पुस्तक बताती है कि बिना बीमारी और बिना दवाई के 100 साल कैसे जिया जाए। क्योंकि रोग होने पर दवाई तो लेंगे ही फिर बी कुछ ना कुछ कमजोरी तो अवश्य ही रह जायेगी। आज की व्यस्त व तनावपूर्ण जीवन शैली में स्वस्थ्य व संतुलित जीवन जीने का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है । अत: “ज्ञान अरोग्यम” पुस्तक उन सरल लेकिन प्रभावशाली जीवन शैली की ओर इंगित करती है। अच्छा समय रहते अच्छा काम कर लेना चाहिए । क्योंके बाद में शरीर साथ नहीं देगा।
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