सभी माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चों को जीवन के हर क्षेत्र में सब-कुछ सर्वश्रेष्ठ मिले और वे स्वस्थ, सफल और सुखी व्यक्ति बनें। वे इसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, बहुत त्याग भी, फिर भी उन्हें लगता रहता है कि वे माता-पिता के रूप में बहुत अच्छे नहीं सिद्ध हुए। अधिकांश माता-पिता दूसरे खुशहाल परिवारों से ईर्ष्या करते हैं और पालन-पोषण में जिसे वे सफलता मानते हैं, उसके लिए फार्मूला खोजते रहते हैं।
यहां मुद्दा यह है कि अच्छे पालन-पोषण के लिए कोई औपचारिक शिक्षा और प्रशिक्षण नहीं होता। हम अधिकतर वही करते हैं जो हमारे माता-पिता हमारे साथ करते थे। हमने कभी इस बात पर विचार नहीं किया कि पालन-पोषण एक ऐसा कौशल है, जिसे सीखकर हम अपने बच्चों की बेहतर देखभाल कर सकते हैं। पर यह कौशल हम सीखें किस् से?
अच्छा पालन-पोषण न केवल एक बच्चे को बेहतर बनाना है, बल्कि एक प्रोडक्शन लाइन को बेहतर बनाना है जिसके लाभ पीढ़ी-दर-पीढ़ी मिलेंगे।
भले ही हम आदर्श न बन सके, कम से कम बेहतर माता-पिता तो बन सकते हैं। इसके लिए हमें अपने पालन-पोषण के अच्छे और कमजोर बिंदुओं को देखना होगा, विभिन्न पालन-पोषण शैलियों को जानना होगा, और क्या सुधार किया जा सकता है और इसे कैसे करना है यह सीखना होगा। आपको आश्चर्य होगा कि इनमें से अधिकतर सुधार संभव भी हैं।
इस क्षेत्र में शोध और प्रकाशन के मामले में पश्चिमी देश हमसे कहीं आगे हैं। 140 करोड़ के देश के लिए हमारे पास इस संबंध में न तो प्रशिक्षण सुविधाएं हैं और न ही कोई मार्गदर्शन करने वाला। उसके विकसित होने तक हम साहित्य के माध्यम से कुछ अंतर्दृष्टि प्राप्त कर सकते हैं लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि हिंदी में इस विषय पर किताबें न के बराबर हैं।
इसी विषय-वस्तु के साथ हिन्दी-भाषी पाठकों के लिए प्रस्तुत है अनुभवी लेखक-द्वय द्वारा यह पुस्तक।
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