पहले के समय में पक्षियों के लिए प्रयाप्त जंगल थे. जिसे हमने अपने मतलब और बढ़ती जनसंख्या के कारण धीरे धीरे हम जंगल को उजाड़ रहे है. और दिखावे नाम के लिए करोड़ों पेड़ो में से सिर्फ लाख पेड़ ही लग पा रहे है.बाकी पेड़ सिर्फ फाइल में ही लग रहे है. जंगल कम होने के कारण प्रयाप्त मात्रा में वर्षा भी नहीं होती इस कारण गर्मी आते ही नदी और तालाब गर्मी सूखने लगते है और जल संकट भी बढ़ जाता है। जंगली जानवरो और पक्षियों के लिए बहुत मुसीबत हो जाती है. हमारे मानव जाती के कारण ही ये सब हो रहा है. अतः इन्हे बचाने का मुहीम भी हमें ही करना पड़ेगा. इसी को ध्यान रखते हुए पक्षी बचाओ अभियान के तहत हमारी गौरैया नामक संकलन का प्रकाशन किया जा रहा है. ताकि इस संकलन के माध्यम से हमारे आँगन में आने वाले सभी पक्षियों को दाना और पानी दे और उनकी रक्षा कर सके. हो सके तो पेड़ो पर भी दाना और पानी की व्यवस्था हम सभी के द्वारा किया जाए. उन्हें भी हमारे जैसा जीवन वितीत करने का अधिकार है. और हमारे जैसा उनका भी परिवार होता है।मै विशेष रूप से मुस्कान केशरी जी को धन्यवाद देना चाहता हूँ की इनके सहयोग से संकलन का प्रकाशन हो पाया. और इस मौके पर सभी साहित्यकारों को प्रतिज्ञा लेनी चाहिए की हम सब मिलकर अपने अपने क्षेत्र में पक्षियों को बचाने का कार्य करते रहे ।