ज़िंदगी में वक़्त का बहुत अहम क़िरदार होता है । हर चीज़ जो हमारी चारों तरफ घट रही होती है, वो वक़्त के ही सब कारनामे हैं। यह क़िताब ख़्वाब और हक़ीक़त के बीच चल रही कसमकश औऱ वो लड़ाई जो ख़ुदसे लड़ी जा रही होती है उस वक़्त को दर्षाती है । इस क़िताब में कई यादों और ख़्वाबो का ज़िक्र है जो हक़ीक़त में घटें है या सिर्फ़ ख़्वाब ही बने रहे। कई सवाल जो रोज़ मन में उठते है, और कई जिसके जवाब हम बिना जाने ही रह जाते हैं, यह उस वक़्त से गुज़रते हुए कई दास्ताँ में बुनी गयी है।
यह खट्टी मीठी यादों का पिटारा है। हक़ीक़त और ख़्वाब की लड़ाई जो अभी तक ज़ारी है, यह अंधरो से निकल कर उजालों तक का सफ़र है। यह नई बाली हिंदी है, हर भाषा में घुलती मिलती । क़िताब के शब्दों को सरल भाषा में लिखा गया है, ताकि ये रोज़ बाली हिंदी, हर शख्श को अपनी सी लगी। मुझें उम्मीद है की तुम अपनी रौशनी से अपने ख्वाबों को राह दोगे। बस ख़ुद पर विश्ववास करते हुए आगे बढ़िए।
सुमित राय का जन्म बरेली ( उत्तर प्रदेश ) में हुआ , और उनकी परवरिश उत्तर प्रदेश और और दिल्ली में हुई, कक्षा 5 से वो दिल्ली में ही पढ़े और B.Com तक पढ़ाई कर चुके हैं । सुमित पेशे से Creative Designer हैं । उन्होंने लगभग 5 साल Wrist Watch Industry में काम किया और साथ ही साथ Product Design और Filmmaking लाइन में भी उन्होंने कई काम किये हैं ।
उन्होंने काफ़ी नामी ब्रांड और कंपनियों के साथ काम किया है और उन्हें बनाने में अपना योग्यदान दे चुके हैं।
वो पैदाइश ही Artist रहें हैं ।
सुमित को फोटोग्राफी, व्यंग्य और काव्य लेकिन, ट्रैवल राइटिंग, में काफ़ी रुचि है । सोशल साइट की बात करें तो वो अपने पेज @summitraypoetry के नाम से इंस्टाग्राम पर काफी एक्टिव रहते हैं ।