ग़ज़ल हमेशा से सब के दिलो में एक सूकूँ लेकर आती है क्यों कि ग़ज़ल में लिखे हुए अल्फ़ाज़, क़ाफ़िया, रदीफ़, चोट सब के सब कहीं ना कहीं इंसान के दिलों कि बाटे बयाँ करती है। और यही कारण है कि जो भी संगीतकार अपनी मौसिकी में ग़ज़ल का इस्तेमाल करते है । मैंने यह भी देखा है कि ग़ज़ल सुन कर इंसान कभी कभी अपने ग़म भी भूल जाता है। मैंने इस किताब में यही कोशिश कि है। जो सकूँ आप को सुन कर मिलता है वही सूकूँ आपको पढ़ कर मिल पाए। इब्तदा-ए-सुख़न आप को अलग mood में ले जाए इस कोशिश के साथ।