ज़िंदगी की राहें हमेशा सीधी नहीं होतीं। कभी वे बिखरती हैं, कभी मुड़ती हैं—और हर मोड़ पर ज़िंदगी एक नई करवट लेती है।
करवटें उन्हीं मोड़ों पर जन्मी कहानियों का संग्रह है। यहाँ स्त्रियाँ किसी आदर्श प्रतिमा की तरह नहीं, बल्कि बिल्कुल आम इंसानों की तरह सामने आती हैं—हँसती, टूटती, भटकती, संभलती और फिर से उठ खड़ी होती हुईं।
इन कहानियों में कोई रोशनी तलाशता है, कोई अंधेरे से समझौता करता है, और कोई अपनी ही चुप्पी में एक नई भाषा गढ़ लेता है। कभी यह यात्राएँ भारत की गलियों से गुज़रती हैं, कभी विदेश की गलियों में, पर हर जगह एक ही सवाल गूँजता है—“मैं कौन हूँ, और मैं कहाँ से अपनी पहचान शुरू करूँ?”
यह संग्रह आपको पात्रों के साथ चलने पर मजबूर करता है—उनकी आँखों से दुनिया देखने, उनके दिल की धड़कनों को सुनने, और उनकी चुप्पियों में छिपे शब्दों को पढ़ने पर।
करवटें—ज़िंदगी की उन्हीं कहानियों की गवाही है, जिन्हें पढ़कर शायद आप अपनी ही एक करवट पहचान लें।
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