यह किताब एक काव्यसंग्रह है एक व्यक्ति , जो मैं नहीं हूँ , पर ऐसा कहना भी गलत नहीं होगा .. कि जो मुड़ा में ही कहीं है , उसके मन के भावों और कल्पनाओं का अब तक के अपने सफर में उसने जितनी कहानियाँ देखी और जी है उन सभी का एक छोटा सा समूह चंद शब्दों , और पंक्तियों द्वारा , इस किताब में संजोकर आप सभी पाठकों के हवाले कर दिया गया है । आशा है आप सभी इसे केवल पढ़ने के लिए नहीं बल्कि इस सफर को , जो कहता है कहानी आप ही के जीवन से जुड़े कुछ किस्सों की , इसे एक नई तरह से अनुभव करने के लिए भी पढ़ेंगे । और यदि इन कल्पनाओं को आप अपने जीवन से जोड़ पाए तो सही मायने में उस व्यक्ति का यह किताब लिखना भी सार्थक साबित होगा ।