मैत्रेय, जिन्हे शिक्षा स्वयं इंद्रलोक की अप्सरा ने दी और वर प्राप्ति के लिए सहायता करने कामदेव आए।
शुक्राचार्य के वंशज, पाताललोक छोड़ कर पृथ्वी में आ बसे। पवित्र पौधे की असीम शक्ति के पश्चात भी, राक्षस इंसानों से दूर घने जंगलों में रहे, किन्तु इंसानी मांस और रक्त की तड़प उन्हे मजबूर कर देती थी, इंसानी शिकार के लिए।
पृथ्वी के सबसे शक्तिशाली योद्धा रघुवंशियों की मित्रता पूरी पृथ्वी में केवल राक्षसों से थी। जिससे इन मित्रों को हराना किसी के लिए भी असंभव था, परंतु वादन राज्य के महाराज सूर्यवादन, एकछत्र राज की कामना करते थे। अपनी इच्छा पूर्ति के लिए उन्होंने रघुवंश, राक्षसवंश और जीतवंश को तबाह कर दिया। महान और शक्तिशाली योद्धा छल से हार के कगार पर आ गए।
मैत्रेय जिसने केवल आदर्श रानी बनने का स्वप्न देखा था। उनके नाजुक कंधों पर उस कपटी राजा सूर्यवादन को रोकने का भार आ गया। क्या मैत्रेय उसे रोक पाएगी? क्या मैत्रेय अपने परिवार और मित्रों का बदला ले पाएगी?
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