यह कहानी अविनाश और सरस्वती की है। उनके कोई पूर्व जन्म के या इस जन्म के मन के रिश्ते की कहानी। एक अनाथालय से निकले अनाथ युवा अविनाश की कहानी, जिसने आगे बढ़कर वृद्धाश्रम में रहने वाली सरस्वती को अपनी माँ मान कर अपने घर में जगह दी। उनके खून के रिश्ते ने उन्हें बेसहारा छोड़ा और मन के रिश्ते ने उनका हाथ थामा।
यह कहानी उस अनाथालय की है, जहां अविनाश और नंदिनी को उनके बाबा और उनकी बड़ी अम्माँ मिलीं। दो अनाथ बच्चों की कहानी, जिन्हें पैदा होते ही अनाथालय की शरण में दे दिया गया था, लेकिन वहाँ खून के रिश्तों से ज्यादा मन के रिश्ते ने उन्हें लाड़ और दुलार से पाला।
यह कहानी अविनाश के अनाथालय और सरकारी स्कूल में विषम परिस्थिति में भी आगे बढ़ कर जीवन में कुछ बड़ा हासिल करने की है। उसके जीवन के उतार-चढ़ाव, दिल के रिश्तों और समाज में मील के पत्थर गाड़ने जैसे उदाहरण की है।
खून के रिश्तों से बढ़कर, मन के रिश्तों से जुड़े लोगों की सच्ची कहानी है....मन के रिश्ते।
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