19 सितंबर 1951 को कोटा (राजस्थान) की धरती पर जन्मे --- कमल सहाय भटनागर ---
राजस्थान न्यायिक सेवा में 34 वर्षों तक
निक्षपता की कलम से अनेक जीवनों की दिशा लिखते रहे। ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश (सुपरटाइम स्केल) के गरिमामय पद से सेवा निवृत्त हुए पर भावनात्मक संवेदनशीलता,सत्यनिष्ठा और न्याय का प्रकाश
आज भी उनके व्यक्तित्व में उज्ज्वल है।
यह काव्य-संग्रह
एक ऐसे रचनाकार की यात्रा है
जिसने जीवन को
न्यायालय की सीमाओं में जिया,
पर आत्मा को
प्रकृति के आकाश में उड़ने दिया।
“मौन के पंख”
किसी एक भाव की कथा नहीं,
बल्कि जीवन के विविध क्षणों का
संवेदनशील संकलन है—
जहाँ प्रेम है, वियोग है, प्रकृति है, स्मृति है
और स्वीकार की शांत रोशनी भी।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है
जो शब्दों में
अपने ही मन की आहट
सुनना चाहते हैं।