'मौन-मुखर कविताएँ' एक साझा काव्य-संकलन, प्रयास है नए कवि/कवयित्रियों को भी प्रकाशित एवं प्रतिष्ठित साहित्यकारों के साथ एक मंच प्रदान कर, उनकी कल्पनाओं को नई उड़ान देने की। यह प्रयास है कि जिन हाथों ने कलम थामने की, अपने भावनाओं को कागज़ पर उकेरने की बात सोची, उनकी सोच को एक मुकाम देकर, हिंदी काव्य-जगत में एक प्रकाशित कवि/कवयित्रियों के रूप में लाने की। यह प्रयास है नवीन रचनाकारों को पूर्व प्रकाशित रचनाकारों के साथ लाकर, उनके अनुभव, साहित्य-साधना को करीब से जानने और सीखने का अवसर प्रदान करने का।
दोस्तों, अक्सर यह देखने मिलता है कि कुछ कविताएँ पढ़कर हमारे भीतर एक द्वंद्व, एक कोलाहल प्रारंभ हो जाता है, किंतु लब 'मौन' हो जाते हैं। वही दूसरी तरफ़ कुछ कविताएँ मानों अपने हर शब्द के साथ एक बातूनी बालिका की तरह 'मुखर' हो जाती हैं। ऐसी ही कुछ अभिव्यक्तियों की बूँदों को हम इस छोटी-सी सरिता रूपी काव्य-संकलन में समेटकर आपके सम्मुख लेकर आएँ हैं। 'पोयट्री स्ट्रेज' के सदस्यों के साथ मैं इस काव्य सरिता को आप सभी काव्य-प्रेमियों को सादर समर्पित करती हूँ।