"मेरी दिव्य दृष्टि की यात्रा – भाग 1" एक आत्मकथात्मक और रहस्यपूर्ण यात्रा है, जो आपको एक साधारण व्यक्ति से लेकर एक साधक तक के गहन अनुभवों में ले जाती है। यह सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि चेतना की परतों को खोलती एक जीवंत अनुभूति है। इसमें तीसरी आँख (Third Eye), सूक्ष्म शरीर, देवी-देवताओं के दर्शन, मंत्रों की शक्ति, और ईश्वर से जुड़ने के असली अनुभवों को सरल, भावनात्मक और आत्मिक भाषा में साझा किया गया है।
लेखक ने कैसे अपने पुत्र के माध्यम से दिव्य दृष्टि के द्वार खोले, कैसे साधना, हवन, मंत्रजाप, और स्वयं के विश्वास से उन्होंने आत्मा की गहराइयों को स्पर्श किया — यह सब बेहद सहज और सच्चे अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया है। हर अध्याय एक नए द्वार की तरह है, जहाँ पाठक खुद को उस अनुभव में डूबा हुआ पाता है।
यदि आप आध्यात्मिक खोज में हैं, या स्वयं को समझने की यात्रा पर हैं — तो यह पुस्तक आपका दर्पण बन सकती है।
यह भाग पहला है — एक आरंभ, जो आपके अंतर्मन के द्वार खोल सकता है।