ज़िंदगी से तो सभी इश्क़ करते है, क्यूँ ना इश्क़ ज़िंदगी देने वाले से किया जाए। क्यूँ ना इश्क़ आत्मा और परमात्मा का किया जाए। यही सोचकर मैंने ईश्वर से इश्क़ किया। ईश्वर के कितने ही रूप होते है, और शायद मुझे क़िस्मत के रूप में भी ईश्वर से इश्क़ हो गया। इस क़िस्मत को समझने का एक ही ज़रिया था ओर वो था ज्योतिष। मैंने ज्योतिष की किताबें पड़नी शुरू की। जैसा के मैंने बताया के सबसे अलग ओर रोचक मुझे लाल किताब लगी। इसकी कविता जैसी पंक्तिया मेरे दिल ओर मन में बस गई।
लाल किताब को पढ़ने और समझने के बाद मैंने जो ख़ुद नज़्में लिखी उनको इस किताब के ज़रिए आप तक पहुँचा रहा हूँ।