जवानी की दहलीज पर खड़ी, अठारह वर्षीय ,स्वर्गविभा हिंदी पत्रिका,एक त्रैमासिक वेबसाईट पत्रिका है | हिंदी भाषा को वैश्विक साहित्य दर्जा प्राप्त है तथा हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा हो, इसके लिए (स्वर्गविभा पर प्रकाशित
रचनाओं में से ) चुनी हुई उत्कृष्ट रचनाओं को,इस पत्रिका में सम्मिलित किया जाता है | इस विश्वास के साथ कि वैश्विक स्तर पर,हिंदी के पठन-पाठन पर इन रचनाओं का सकारात्मक प्रभाव पड़े |
उम्मीद है कि पिछले अंकों की भाँति ,यह अंक भी पाठकोपयोगी होगा |