विद्यालय और महाविद्यालयों की कक्षाओं सहित चाहे केंटीन हो या कलामंच या फिर बस्ती, मोहल्ले गाँव का कोई किनारा हो.. हर जगह मैंने केवल और केवल प्रेम को खोजा। जीवन मूल्यों को समझा, संस्कारों को समाहित किया और शिक्षा को आत्मसात। बचपन से लेकर यौवन तक और अब आगे भी केवल मैं प्रेम को ही ढूँढ़ने के लिए इस यात्रा पर निकल पड़ा हूँ। मैं विज्ञान का छात्र था, लेकिन 'मेरी प्रेरणा' ने मुझे कवि बना दिया।
प्रस्तुत कविता संग्रह मेरा प्रथम प्रयास है, प्रेम को समझने का और स्वयं को प्रेम में खोजने का। उम्मीद है कि आप इसे पसंद करेंगे और मेरी लेखनी का उत्साहवर्धन कर मुझे लिखने की ‘प्रेरणा’ देंगे। मैं कवि नहीं हूँ ! मैं तो स्वयं कविता हूँ। किसी की लिखी हुई ...
मैं मानता हूँ कि इस दुनिया में कोई त्रुटि रहित नहीं हैं। हर किसी में कुछ न कुछ त्रुटियाँ होतीं हैं। अतः मैं अपनी त्रुटियों के लिए क्षमा चाहूँगा।
बस अपना प्रेम मुझे देते रहिए !
आपका..
कवि कुमार अशोक