प्रेम शब्द सुन कर ही मन दंग हो उठता है वो प्रेम जो दो भावनाओं के मेल से उतपन्न होता है, वो प्रेम जिसमें है मिलन, जुदाई और एहसास का वो समंदर जिसकी गहराई का कोई अंत नहीं, और उसी समंदर में उठते हैं भावनाओं के ज्वार जिसमे डूब कर होता है मिलन के आनन्द का भान और जुदाई के विरह के ताप की अनुभूति और उसी अवस्था में जो प्रेरणा मिलती है लेखक ने वहाँ जाकर प्रेम के अन्तःकरण से निकाले हैं कुछ शब्द के मोती और उसी मोती के मालाओं को कविता का रूप देकर कवि ने 'प्रेम और प्रेरणा-दो भिन्न भावनाओं के अद्भुत आलिंगन को लिखा है। जिसमें आपके मन को छू जाने वाली काव्य रचना है जो प्रेम और प्रेरणा पर आधारित है, तो आइए पढ़ते हैं प्रेम और प्रेरणा दो भिन्न भावनाओं के अद्भुत आलिंगन। धन्यवाद