जब दुनिया चारो तरफ बारूद , बम, मिसाइल, बंदूकों के शोर में डूबी हो, तब कविताए इन सब के खिलाफ एक धीमी सी चीख़ बन जाती है ये वो कहती है, जो कोई और कहने से डरता है। प्रेम कविताओं से इस्तीफ़ा एक ऐसा ही संग्रह है जो सिर्फ़ प्रेम की बातें नहीं करता, बल्कि उस प्रेम की बेबसी मज़हब के आगे , राजनीति के आगे ,प्रेम पे हुए हज़ारो लाखो ज़ुल्म, और इन सब पे समाज की चुप्पी को भी सामने लाता है।
इस संग्रह में लिखी कविताएँ कभी किसी मोड़ पर छूटे रिश्ते से बात करती हैं, तो कभी चौराहे पर पीटे गए मज़दूर से। कभी सत्ता की सच्चाई पर सवाल उठाती हैं, तो कभी ज़ुबान खो चुके समाज की चुप्पी पर। इस संग्रह की शीर्षक कविता जो है प्रेम कविताओं से इस्तीफा , इस कविता को मैं दुनिया के हर मज़लूम ख़ास कर के बच्चे , गाजा के बच्चे , सूडान सीरिया बांग्लादेश मेरे भारत समेत हर उस देश के बच्चो को समर्पित करता हूँ जिनके हालातो पर ये दुनिया चुप है।। ये सिर्फ़ कविताएँ नहीं हैं ये इन्कार हैं, इकरार हैं, एक पुल हैं इंसानो को इंसानो के दर्द से जोड़ने का, और एक उम्मीद हैं । यह किताब बताती है प्रेम के रास्ते में अनेक बाधाओं को चाहे वो प्रेम एक प्रेमी का प्रेमिका से हो , एक दोस्त का दोस्त से या एक इंसान का इंसान से हम शायद बहुत जल्दी उस समय में चले जाये जब प्रेम कविताए कविताएँ लिखना भी एक अपराध बन जाए क्यूंकि तब बंदिशे होंगी प्रेम पे इससे प्रेम नहीं कर सकते उससे प्रेम नहीं कर सकते , ऐसे नहीं कर सकते वैसे नहीं कर सकते, तब सबसे ज़रूरी प्रेम पे कविता है प्रेम तो वो पुल है जो मनुष्य को ईश्वर से जोड़ता हैं। ईश्वर तक ने मनुष्य से पहले प्रेम बनाया होगा और शायद उसी प्रेम में या प्रेम से मनुष्य।।
यहसंग्रहप्रेमकविताओंसेइस्तीफाआपसबकोसमर्पित।।
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