श्रीमद्भगवद्गीता का यह हिन्दी काव्य रूप, सहज-सरल तो है ही, लयात्मक भी है। जिसे प्रभु चिंतन में आत्मलीन होकर गाया भी जा सकता है। श्रीमद्भगवद्गीता रुपी पावन ग्रंथ विश्वभर में आध्यात्मिक ज्ञान के अजस्र स्त्रोत के रूप में प्रसिद्ध है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रणभूमि में अर्जुन को दिए उपदेश, सात सौ श्लोकों में निबद्ध हैं। जो मानव हृदय की दुर्बलता, कुंठा, भय, विषाद को दूर करके हृदय में कर्म और कर्तव्य का भाव निसृत करते हुए मन को भगवान के चरणबिंदु से एकनिष्ठ कर देता है। यह ग्रंथ मानव को कर्म-अकर्म, उचित-अनुचित का भेद भी समझाता है।
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