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TUM / तुम

Author Name: Rameshwar Prasad Srivastava | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

मानव हृदय शाश्‍वत प्रेम, मानवता, प्रकृति एवं देश-प्रेम के भावों से भरा होता है। “तुम” काव्‍य संग्रह के रचयिता ने अपने अन्‍तर्मन के इन्‍हीं भावों को शब्‍दों में उकेरा है। कविताओं में ग्रामीण अंचल का जीवन, अभाव और संघर्ष है तो कहीं-कहीं समकालीन परिदृश्‍य पर कटाक्ष भी है। 

‘तुम’ कविता में प्रिये से विछोह् का, ‘पचमढ़ी में बसंत’, में प्रकृति व प्रेम का एवं ‘एक बूंद’ में सागरतल में पड़ी एक उदास बूंद के संघर्ष का मर्मस्‍पर्शी चित्रण है।

जीवन के सभी रंगों में रंगा यह काव्‍य संग्रह हमें अपने गांव, बचपन, यौवन और बीते हुये दिनों को एक बार पुन: जीने का अवसर देता है, और आनंद से भर देता है।  

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रामेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव

स्‍वर्गीय श्री रामेश्‍वर प्रसाद श्रीवास्‍तव का जन्‍म 16 मार्च 1928 को मध्‍यप्रदेश के शाजापुर जिले के ‘सुन्‍दरसी’ नामक गाँव में हुआ था। उनकी शिक्षा - दीक्षा उज्‍जैन व इंदौर में हुई। एम.ए., एल.एल. बी. और साहित्‍य रत्‍न करने के बाद प‍त्रकारिता, शिक्षण और रंगकर्म उनकी रुचि के क्षेत्र रहे।

मध्‍यप्रदेश विधानसभा में अनुवादक से नौकरी शुरु कर राजस्‍व अधिकारी बने और डिप्‍टी कलेक्‍टर के पद से सेवानिवृत्‍त हुये। आपके तीन कविता संग्रह- (बालगीत, माखनचोर, तुम), एक गजल संग्रह- (आईना), एक उपन्‍यास- (साध्‍वी) , सत्‍यनारायण कथा का पद्यानुवाद और ‘श्रीमद् भगवत् गीता’ का अवधी भाषा में पद्यानुवाद- (गीतायन) प्रकाशित हो चुके हैं। 17 अगस्‍त 2015 को उनका स्‍वर्गवास हो  गया। 

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