अब आप यह पढ़ चुके हैं। या सबसे पहले इसे ही पढ़ रहे हैं। दोनों सूरतों में बात यही है कि कोई बात नहीं है। अगर अंधेरे में डर नहीं लगता और रोशनी आँखों में लगती है, यह तुम्हारी किताब है। अगर आगे देखने का मन नहीं और पीछे देख नहीं पाते, यह तुम्हारी किताब है। अगर फोटो देखते समय ध्यान पहले फोटो पर जाने के बाद उसके टूटे फ्रेम पर भी जाता है, तो यह तुम्हारी किताब है।