“काव्यांजलि” एक कोशिश है, जिसमें महज़ ख्यालों को पिरोकर काव्यात्मक रूप से प्रस्तुत किया है। ये किसी भी साहित्यिक विधा के अन्दर नहीं आते और यही इसकी खूबसूरती भी है। कहा जाता है कि एक अच्छा लेखक या कवि वही होता है जो न सिर्फ अपने तजुर्बे से बल्कि औरों के तजुर्बो से भी प्रभावित होता है और उन्हें अपने शब्दों में कहने का हुनर रखता है, लेकिन इस किताब में ऐसा नहीं। इस किताब की हर रचना उस व्यक्ति के जीवन की निजी जद्दोजहद से प्रभावित है, कारण स्पष्ट बात की, लेखन किसी भी प्रकार का हो उसका आग़ाज़ लिखने वाला खुद के जीवन में घट रही या घट चुकी घटनाओं को शब्द प्रदान करने केलिए करता है।
"काव्यांजलि" में कोशिश की गई है कि मन के अन्दर उठ रहे भावों को जितनी हो सके सहजता से काव्यात्मक रूप में रखा जा सके। लेकिन रचनाकारों का उर्दू अदब और शेर-ओ-शायरी को सुनने और पढ़ने के रुझान के कारण कहीं-कहीं कुछ अनसुने से लफ़्ज़ों का इस्तेमाल भी हुआ है।
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