कर्मफल जीवन का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सिद्धांत है। हर व्यक्ति को अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है, चाहे इस लोक में या फिर परलोक में। लेकिन अगर कोई परलोक से भी बच निकले तब भी क्या वो अपने कर्मों के फल से बच जाएगा?
मदमस्त ऐसे ही एक व्यक्ति की कहानी है जो कर्मों के फल से बचने की हर संभव प्रयास करता है लेकिन बच नहीं पाता है। यह कहानी है विनायक उर्फ़ भूरी की,जो गाँव से शहर आता है जहाँ उसे बहुत सारें संघर्ष करने पड़ते है। इसी संघर्ष के दौरान उसकी मुलाकात जैनी से होती है और वह जैनी को दिल दे बैठता है लेकिन उसका दिल तब टूटता है जब उसे पता चलता है कि जैनी किसी और से प्यार करती है। वह इसे स्वीकार करता है और उसके जीवन में नैना आती है, जो विनय से बेहद प्यार करती हैं। यह सब तब बदल जाता है जब विनय को पता चलता है कि जैनी को एक गंभीर बीमारी है और उसके इलाज के लिये बहुत से पैसों की आवश्यकता है। इसके लिये विनायक अपनी हदों को पार कर देता है। वह एक ऐसा अपराध करता है जिसका प्रायश्चित उसे मरने के बाद भी करना पड़ता है।