मुक्त छंद की काव्य पुस्तक "मंझली मां" का उपजीव्य भारतीय संस्कृति के सर्वाधिक उज्ज्वल चरित्रों में एक,राम, का वृत्त है। परन्तु, इसमें राम के जीवन - निर्माण की रेखाओं की प्रस्तुति रामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण से सर्वथा भिन्न संदर्भ में की गयी है जहां कैकेयी को राम की विमाता के रूप दिखाते हुए भी, राम के प्रति उनके उदात्त और अद्वितीय स्नेह को केन्द्र में रखा गया है। पुस्तक के रचयिता, श्री पाठक ने, उन्हें ऐसी भावप्रवण नारी के रूप में चित्रित किया है जो राष्ट्र और विश्व मानवता के संरक्षण के प्रति समर्पित है। कैकेयी और मंथरा के जो चित्र गढ़े गए हैं, वे चमत्कृत करते हैं। रचनाकार की इस नयी दृष्टि एवं प्रस्तुति को अनुरागी एवं सहृदय पाठकों का समर्थन और स्नेह मिलेगा, ऐसी आशा की जाती है।
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