यह पुस्तक मेरे उन सभी सहपाठीयों को समर्पित हैं, जो कॉलेज के दिनों से अब तक सदा मेरे साथ जुडे है। २०१६ में लिखनी शुरू हुई यह कहानी २०२१ में अब जाकर पुरी हो पायी है। इस पुस्तक को लिखने के दो कारण है।एक, तो आज की इस डिजीटल दुनिया में जब अधिकतर लोग अपने मोबाईल से जुडे रहते है, ऐसे लोगों को किताब पढने के लिये बाध्य किया जाये, दुजे, आर्किटेक्चर विभाग पर अब तक बहुत कम कहानियाँ पढने को मिलती है।तो, दोनों ही बातों को एक धरातल पर लाना ही मेरा उद्देश्य है। कहानी शुरू होती है कुछ ऐसे मित्रों के बीच, जो डिपार्टमेंट ऑफ आर्किटेक्चर के छात्र है। इसकी शुरूआत उनके प्रारंभिक पढाई लिखायी से शुरू होती है, जो धीरे धीरे एक दुसरे को अपने में पिरोती जाती है। यहाँ कुछ छात्र-छात्राओं का आपस में एक स्वाभाविक आकर्षण भी निर्मित होता है जो आगे चल कर कहानी को एक रोचक मोड पर ला खडा करती है।