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Tarkash / तरकश

Author Name: Prem Nisheeth | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

तरकश संग्रह है, पैने, नुकीले, धारदार व्यंगों का । ये संग्रह है चंद पंक्तिओं में कही गयी संजीदा बातों का । ये प्रहार है, सामजिक कुरीतियों, आडम्बर , अव्यवस्थाओं, राजनैतिक दांव पेच व दोगलेपन पर। सरल परन्तु धारदार शब्दों  के माध्यम से एक प्रयास है सोये हुए विचारों को झकझोर के जगाने का I तरकश का हर तीर आपकी अंतरात्मा पर  सीधा प्रहार है, जो मजबूर कर देगा आपको सोचने पर, अपने आस पास फैली विसंगतियों के बारे में।

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प्रेम निशीथ

जन्म – 14 मार्च 1947 देहावसान – 9 मार्च 2019
प्रेम निशीथ जी का जन्म कानपुर शहर के एक जाने माने डॉक्टर के यहाँ हुआ I माँ एक गृहणी व सहज महिला थीं I जवानी में कदम रखते रखते दो कार्य पूर्ण किये, पहला क्राइस्ट चर्च कोलेज से B।Sc की डिग्री और दूसरा साहित्य की तरफ पहला कदम I शुरुआत से ही कविता, कहानी आदि की तरफ रुझान रहा। विचार मौलिक और क्रांतिकारी थे, आजादी के बाद नए भारत के निर्माण के दौरान कुछ कवि सम्मेलनों में अपनी बात रखने  का अवसर मिलने लगा, किन्तु अचानक आये  पारिवारिक संकटों के चलते, DMSRDE ( रक्षा अनुसंधान संस्थान ), आगरा में एक अनुसंधान वैज्ञानिक के तौर पर कार्य भार संभालना पड़ा I कुछ वर्षों के बाद एक शिक्षिका के साथ उनका प्रेम विवाह हुआ और दो पुत्रियाँ व एक पुत्र उनके जीवन में आये I उम्र के मध्य पड़ाव में आते आते सांसारिक मोह माया और सामाजिक ढाँचे से मन विचलित होने लगा, उसी दौर ( 1974) में ओशो के सानिध्य में आये और संन्यास ग्रहण किया, वहीँ उन्हें प्रेम निशीथ ( आधिकारिक नाम :ऍन के श्रीवास्तव)  नाम दिया गयाI अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वाह करते ही 1992 में उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी से स्वैछिक अवकाश ले लिया I नौकरी के दौरान कुछ वर्षों का अंतराल आया पर रचनाकार मन फिर से अंगडाई लेने लगा, और लेखन का कार्य अपने रफ़्तार में वापस आ गया I स्थानीय व कई राष्ट्रिय पत्र पत्रिकाओं में उनकी रचनाओं को स्थान मिलने लगा I ओशो टाइम्स के पाठक उनकी रचनाओं के मुरीद होने लगे I कवि व व्यंगकार प्रेम निशीथ जी की पहली पुस्तक 1997 में  “ उसी की ये शराब “ के नाम से डायमंड पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित हुई, जिसका दूसरा संस्करण 2002 में प्रकाशित हुआI राजनैतिक दांव पेंच, सामाजिक विसंगतियां, रूडिवादी मानसिकता व रीती रिवाज़ एवं अव्यवस्था हमेशा उनके विचारों को झकझोरती रहीं, और शायद यही कारण रहा की उनके लेखन में व्यंग ने मुख्य स्थान ले लिया और उसके नश्तर की धार और तेज़ होती गयी I सन 2000 में "हर आइना हैरान है" के नाम से पहला व्यंग संग्रह प्रकाशित हुआ और 2008 में " हंगामा है क्यूँ बरपा" पुस्तक प्रकाशित हुई। ये भी व्यंग सग्रह था I वेब सीरीज प्रतिकार व फीचर फिल्म हिल व्यू विला के लिए उन्होनो गीत भी लिखे I प्रेम निशीथ जी मौजूदा तकनीक व विकास के कदम से कदम मिला के चलने का निरंतर प्रयास करते रहे और इसी के चलते फेसबुक पर उनकी सक्रियता ज़ारी रही। सामयिक मुद्दों पर उनकी तीखी व निडर प्रतिक्रियाओं के दौर चलते रहे I 2019 मार्च में ह्रदयरोग के कारण उनका निधन हो गया I “तरकश” उनकी अप्रकाशित रचनाओं का संग्रह हैI

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