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Yantra Tatvam / यन्त्र तत्त्वं यन्त्र शक्ति ग्रन्थ

Author Name: Guru Gaurav Arya | Format: Hardcover | Genre : Religion & Spirituality | Other Details
मानव को अपने जीवन में जिस चीज़ कि सबसे ज्यादा जरुरत महसूस हुई वह है सुख, क्यूँकि मनुष्य को सुख प्राप्त हो जाये तो वह संतुष्ट हो जाता है, पर ऐसा होना संभव नहीं है। सृष्टि कि संरचना के उपरांत कुछ न्यूनता जरूर रह गयी थी, लेकिन भगवान शिव ने इन सब न्यूनता को ध्यान में रखते हुए तंत्र-मंत्र-यन्त्र का निर्माण किया, जिससे मानव अपने जीवन कि न्यूनता को समाप्त कर सके। इन्ही में से एक महत्वपूर्ण विद्या है "यन्त्र विद्या" यन्त्र अपने आप में चमत्कारी है, कठिन से कठिन कार्य को भी सम्पन्न करने कि शक्ति यंत्रो में है। यन्त्र तत्वम मैंने इस पुस्तक को इसलिए नाम दिया है क्यूँकि यन्त्र शास्त्र अपने आप में उच्च कोटि का है, और एक असीमित सागर के सामान है, जब तक अंको का अंत नहीं किया जा सकता तब तक यंत्रो के निर्माण का अंत भी नहीं किया जा सकता है। यंत्रो में साक्षात् ईश्वर का निवास होता है, क्यूँकि यंत्रो में अंक, बीज, और पांच तत्वों का समागम होता है, जिसको लिखने हेतु जो विशेष प्रकार कि स्याही और कलम का प्रयोग होता है, वो यन्त्र को शक्ति प्रदान करती है, या यूँ कहे कि देवताओं को स्थान देती है। यन्त्र की आकृति और उनमें छुपे बीज जैसे ह्रीं, श्रीं, लं, रं, क्रीं आदि ही यंत्रो को एक दूसरे से भिन्न करते है। यंत्रो को कुछ विशेष मुहूर्त, नक्षत्र, होरा आदि में ही लिखा जाता है। यंत्रो का प्रयोग कठिन से कठिन कार्यो को सफल कर देता है। यंत्रो से सिद्धि भी प्राप्त की जा सकती है, यंत्रो देवी देवता की सिद्धि प्राप्त करने में सहायक होते है, यंत्र भूत प्रेत नाशक भी होते है। खोये व्यक्ति या वास्तु को वापस पाना, विशेष कार्य सिद्धि, आदि यंत्रो के माध्यम से संभव है।
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Hardcover
Hardcover 300

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Delivery by: 21st Apr - 24th Apr

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गुरु गौरव आर्य

गौरव आर्य का जन्म १९९२ को उत्तर प्रदेश में हुआ। बचपन से शांत और सरल स्वभाव के मालिक रहने के कारण अपनी साधना और पढाई लिखाई में ही समय व्यतीत किया। अपनी प्रारंभिक शिक्षा को पूर्ण करने के उपरांत विज्ञान के क्षेत्र मंत जाने का निर्णय लिया और उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी से वर्ष २०१४ में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में प्रथम श्रेणी में स्नातक की उपाधि प्राप्त की, बचपन से ही धर्म और ज्योतिष, तंत्र के प्रति झुकाव रहने के कारण, इन गुप्त विधान में ज्यादा समय व्यतीत करने लगे। लेकिन अभियंता होने के कारण कुछ कम्पनी के साथ काम करने के उपरांत मशीन को डिज़ाइन करने का कार्य ४ सालो तक किया, लेकिन अपने व्यक्तित्व और धार्मिक प्रवृत्ति के कारण शिष्यों की संख्या बढ़ने लगी कारणवश अपनी नौकरी को छोड़कर "आस्था और अध्यात्म" नामक एक कंसल्टिंग सर्विस का निर्माण किया। अपनी ज्योतिषविद्या और यन्त्र शक्ति के आधार पर काफी लोगों को जीवन दिया, न जाने कितनों की गृहस्थी को नया जीवन दिया, जीवन से हार चुके लोगों को जीवन का उद्देश्य दिया, भगवान् शनि के प्रति बचपन से ही आस्था होने के कारण अपना सम्पूर्ण जीवन लोगों की सेवा में ही समर्पित कर दिया, काफी सत्य भविष्यवाणी करने के उपरांत २०१७ में देव भूमि उत्तराखंड में ‘ज्योतिष श्री’ उपाधि दी गयी फिर २०१८ में मुख्यमंत्री उत्तराखंड द्वारा ‘ज्योतिष विभूषण’ उपाधि दी गयी। अपने शिष्यों को अप्सरा सिद्धि, बगलामुखी साधना और अन्य साधनायें सम्पन्न करा चुके हैं और कराते रहेंगे यंत्रो के महत्व को समझ कर यंत्रो के निर्माण पर ध्यान दिया और तंत्र विज्ञान में १००० से अधिक नवीन यंत्रो का निर्माण किया, जो ज्योतिष के उपाय के रूप में काफी सहायक है। साथ ही गौरव आर्य ‘पैरानॉर्मल एक्सपर्ट’ के रूप में भी जाने जाते है। असामान्य गतिविधियाँ और उनके कारण क्या है? उसके लिए भी जाने जाते है। शाबर मंत्रो का भी निर्माण समय रहते करते रहते है, न जाने कितने साधको को तंत्र मार्ग का सही उपदेश दें चुके हैं, और भारत की इस गुप्त पद्द्ति को संजोकर रखने का प्रयास निरंतर कर रहे हैं। मंत्र दीक्षा और साधना विधान का ज्ञान निरंतर अपने शिष्यों को देते रहते हैं। आत्माओं के रहस्य और तंत्र विद्या के रहस्य को खोलने हेतु निरंतर प्रयास करते रहते हैं, आने वाली अपनी नवीनतम पुस्तकों के माध्यम से भी इन रहस्यों को उजागर करते रहेंगे। महाकाल की शरण उज्जैन में गौरव आर्य ज्योर्तिविद्चार्य एवं अनुसंधानकर्ता (तंत्र विशेषज्ञ, असाधारण गतिविधि विशेषज्ञ, यन्त्र और मंत्र निर्माणकर्ता, चिकित्सा ज्योतिषी) (ज्योतिष श्री, ज्योतिष विभूषण)
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