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Adigrihasth Dashnami Brahman / आदिगृहस्थ दशनामी ब्राह्मण स्मार्त ब्राह्मण समाज/ smaart braahman samaaj

Author Name: Goswami Jyoti Giri | Format: Hardcover | Genre : Religion & Spirituality | Other Details

पश्चिमी सभ्यता और संस्कृति की ओर बढ़ते कदमों के साथ, आदिगृहस्थ दशनामी ब्राह्मण समाज अपनी पवित्र परंपराओ से दूर होता जा रहा है। यह एक चिंताजनक और दुखद परिदृश्य है, जो हमारी संस्कृति और धर्म की जड़ों को कमजोर कर रही है। इस पुस्तक के माध्यम से, हमने आदिगृहस्थ दशनामी ब्राह्मण समाज के युवाओं को उनकी विरासत, मूल्यों, और परंपराओं के बारे में जागरूक करने का प्रयास किया हैं। हमारा लक्ष्य है कि युवा वर्ग अपने समाज के लिए एक सकारात्मक योगदान करें, और हमारी संस्कृति की जड़ों को मजबूत बनाएं।

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गोस्वामी ज्योति गिरि

नर्मदा नदी के पावन तट पर स्थित नर्मदापुरम, मध्य प्रदेश में इनका अवतरण हुआ। यह आगे चलकर एक महान व्यक्तित्व के रूप में उभरी, जिन्होंने अपने जीवन को शिक्षा, समाज सेवा और नारी सशक्तिकरण के लिए समर्पित किया।

 

पुश्तैनी भाटों द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, इनके पूर्वजों की मूलभूमि पुष्कर, राजस्थान थी। कालांतर में, वे मध्य प्रदेश के नर्मदपुरम जिले में पुनर्वासित हो गए। इस पलायन के परिणामस्वरूप, इनके रहन-सहन और वेश-भूषा में राजस्थानी संस्कृति की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। इनकी संस्कृति की जड़ें राजस्थान में हैं, लेकिन इनकी जीवनशैली मध्यप्रदेश की संस्कृति से प्रभावित हुई है।

 

जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए, वह गोस्वामी विक्रम गिरि के साथ परिणय सूत्र में बंधीं। इस संयोग ने उनके जीवन को एक नए दिशा में मोड़ दिया, और वे दशनाम गोस्वामी समाज के विभिन्न संगठन से जुड़कर समाज और नारी सशक्तिकरण के लिए कार्यरत हो गईं। आज, वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए कार्यरत हैं।

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